Rameshwaram Temple 22 wells History In Hindi | रामेश्वरम मंदिर 22 कुओं का इतिहास हिंदी में
Rameshwaram Temple 22 Wells History In Hindi
तमिलनाडु के रामेश्वरम् में है रामनाथस्वामी ज्योर्तिलिंग, जिसे श्रीराम ने समुद्र के बालू की रेत से बनाया था | यह तीर्थ हिन्दुओं के चार धामों में से एक है। इसके अलावा यहां स्थापित शिवलिंग बारह द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है
कथा
सीताजी को छुड़ाने के लिए राम ने लंका पर चढ़ाई की थी | श्री राम ने, युद्ध कार्य में सफलता तथा विजय के पश्र्चात कृतज्ञता हेतु उनके आराध्य भगवान शिव की आराधना के लिए समुद्र किनारे की रेत से शिवलिंग का अपने हाथों से निर्माण कीया, तभी भगवान शिव सव्यम् ज्योति स्वरुप प्रकट हुए ओर उन्होंने इस लिंग को श्री रामेश्वरम का पद दिया |
रावण भी साधारण राक्षस नहीं था। वह महर्षि पुलस्त्य का वंशज ओर वेदों का ज्ञानी ओर शिवजी का बड़ा भक्त भी । श्रीराम को उसे मारने के बाद बड़ा खेद हुआ। ब्रह्मा-हत्या के पाप प्रायस्चित के लिए श्री राम ने युुद्ध विजय पश्र्चात भी यहां रामेश्वरम् जाकर पुुुजन किया |
रामेश्वरम का पूरा वीडियो गाइड22 तीर्थों के जल से स्नान
- कहते हैं कि भगवान श्रीराम ने अपने बाणों से इन कुंडों का निर्माण किया था।
- यहां कुल 24 कुंड हैं जिनमें से दो कुंड सूख गए हैं |
- यहां पर सुबह भक्तों के दर्शन करने से पहले 22 तीर्थों के जल से स्नान उन्हें करना होता है |
- पहले वे समुद्र में स्नान करते हैं इसको अग्नि तीर्थ जाना जाता है |
- वहां पर 22 तीर्थों के जल से स्नान कराने के लिए 51 रुपए की रसीद काटी जाती है
- पहले हमें कुओं में स्नान करना होगा और फिर दर्शन जाना होगा |
- समु्द्र के खारे पानी के किनारे पर कुंडों में मीठा जल निकलता है।
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